सांकरा (जोंक) में श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथयात्रा; युवाओं में दिखा भारी उत्साह।

 सांकरा (जोंक) में श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथयात्रा; युवाओं में दिखा भारी उत्साह

सांकरा (जोंक)। स्थानीय क्षेत्र में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा अत्यंत धूमधाम, हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में निकाली गई। इस पावन उत्सव में सांकरा सहित आसपास के अंचल से आए हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा क्षेत्र 'जय जगन्नाथ' और 'हरे कृष्ण' के जयघोष से गुंजायमान रहा

युवाओं ने संभाली कमान, भक्ति के रंग में रंगे नजर आए नवयुवकइस वर्ष की रथयात्रा में सबसे खास और आकर्षक पहलू युवाओं की भारी भागीदारी रही। क्षेत्र के नवयुवकों और युवाओं की टोलियों ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर रथयात्रा में हिस्सा लिया, बल्कि व्यवस्था से लेकर भक्ति संगीत तक हर मोर्चे पर कमान संभाली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवा भगवान की भक्ति में लीन होकर झूमते-नाचते नजर आए। रथ खींचने से लेकर महाप्रसाद वितरण और सुरक्षा व्यवस्था में युवाओं के इस अद्वितीय योगदान और अनुशासन की हर तरफ सराहना हो रही है

विशेष पूजा-अर्चना और 'छेरा पंहरा' की रस्मरथयात्रा महोत्सव की शुरुआत सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के विशेष शृंगार, महाआरती और छप्पन भोग लगाने के साथ हुई। इसके पश्चात उड़ीसा की पारंपरिक तर्ज पर रथयात्रा की मुख्य रस्म 'छेरा पंहरा' (सोने की झाड़ू से रथ के मार्ग की सफाई) संपन्न की गई। इस पावन दृश्य को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही

भक्तों ने खींचा रथ, बरसी महाप्रभु की कृपादोपहर के शुभ मुहूर्त में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को भक्तों द्वारा जयकारों के बीच रथ पर विराजमान कराया गया। जैसे ही महाप्रभु का रथ मुख्य मार्ग पर आगे बढ़ा, भक्तों में रथ खींचने और भगवान की एक झलक पाने की होड़ मच गई। मान्यता है कि रथयात्रा के दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने गर्भगृह से बाहर आते हैं

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत, बंटा महाप्रसादनगर भ्रमण के दौरान स्थानीय नगरवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह पर पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल, शरबत और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। पारंपरिक बाजे-गाजे, शंखध्वनि, युवाओं के हैरतअंगेज डंडा नृत्य और कीर्तन मंडलियों ने रथयात्रा के उत्साह को दोगुना कर दिया

गुंडिचा मंदिर (मौसी मां के घर) पहुंचे भगवाननगर भ्रमण करते हुए महाप्रभु की रथयात्रा देर शाम प्रसिद्ध गुंडिचा मंदिर (मौसी मां के घर) पहुंची, जहां भगवान आगामी कुछ दिनों तक विश्राम करेंगे। इस सफल और भव्य आयोजन के लिए मंदिर समिति के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने युवाओं की ऊर्जा, सभी श्रद्धालुओं, क्षेत्रवासियों और प्रशासन का विशेष आभार व्यक्त किया है

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